Income Tax Rules 2025 (इनकम टैक्स रूल्स 2025) : हमारे देश में खेती को आय का एक प्रमुख साधन माना जाता है। किसानों के लिए सरकार द्वारा कई तरह की छूट और लाभ दिए जाते हैं, लेकिन बहुत से लोग नहीं जानते कि खेती से होने वाली आमदनी पर भी कुछ शर्तों के तहत टैक्स लग सकता है। 2025 में इनकम टैक्स के नए नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं, जो किसानों और खेती से जुड़े अन्य लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि खेती की ज़मीन पर कितना टैक्स लगेगा और किन परिस्थितियों में छूट मिल सकती है।
Income Tax Rules 2025 : खेती से होने वाली आमदनी पर टैक्स का प्रावधान
भारत में खेती से होने वाली आमदनी को आमतौर पर टैक्स से मुक्त रखा गया है, लेकिन यह पूरी तरह से टैक्स-फ्री नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में इस पर कर लगाया जा सकता है।
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किन परिस्थितियों में खेती की आमदनी टैक्स-फ्री है?
- अगर खेती की ज़मीन ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है।
- यदि ज़मीन पर की गई कृषि गतिविधि से होने वाली आय को ही घोषित किया गया हो।
- यदि कृषि उत्पादों को बेचकर हुई आय सीधे खेत से निकली हो।
किन परिस्थितियों में टैक्स देना होगा?
- अगर खेती की ज़मीन शहरी क्षेत्र में स्थित है।
- यदि कृषि उत्पादों को प्रोसेस करके या किसी अन्य व्यवसाय के तहत बेचा गया है।
- अगर खेती से होने वाली आमदनी किसी अन्य स्रोत की आय से जुड़कर ज्यादा हो जाती है।
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2025 में नए इनकम टैक्स नियम और उनका असर
सरकार ने 2025 के बजट में कृषि क्षेत्र से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण नियमों को स्पष्ट किया है। इन नए नियमों का मकसद टैक्स चोरी को रोकना और असली किसानों को फायदा पहुंचाना है।
| नियम | विवरण |
|---|---|
| ग्रामीण और शहरी क्षेत्र का निर्धारण | 10,000 से अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र को शहरी माना जाएगा |
| कृषि भूमि की बिक्री पर टैक्स | 3 साल से अधिक समय तक रखी गई भूमि को बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा |
| किराए पर दी गई कृषि भूमि | यदि कोई व्यक्ति अपनी खेती की ज़मीन किराए पर देता है तो उसे टैक्स देना होगा |
| कृषि गतिविधियों से होने वाली आय | यदि आय प्रोसेसिंग या बिजनेस के ज़रिए हो रही है तो इसे बिजनेस इनकम माना जाएगा और टैक्स लगेगा |
| कृषि से जुड़ी कंपनियों पर कर | एग्रीकल्चर आधारित कंपनियों पर कॉरपोरेट टैक्स लागू होगा |
खेती की ज़मीन की बिक्री पर टैक्स नियम
अगर कोई किसान अपनी खेती की ज़मीन को बेचता है, तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स लागू हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि ज़मीन कितने समय तक किसान के पास रही और उसका स्थान क्या था।
कैपिटल गेन टैक्स के नियम
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): यदि ज़मीन 3 साल से कम समय के लिए रखी गई थी, तो इससे हुई आय पर व्यक्ति की आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
- लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): यदि ज़मीन 3 साल से अधिक समय तक रखी गई थी, तो टैक्स 20% (इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ) लगेगा।
कैपिटल गेन टैक्स से बचने के उपाय
- यदि किसान अपनी ज़मीन की बिक्री से हुई आय को दूसरी कृषि भूमि खरीदने में निवेश करता है, तो टैक्स से छूट मिल सकती है।
- सेक्शन 54B के तहत, यदि कोई व्यक्ति बिक्री के दो साल के अंदर दूसरी खेती की ज़मीन खरीदता है, तो टैक्स से राहत मिल सकती है।
कृषि से जुड़ी कंपनियों पर नया टैक्स नियम
अगर कोई व्यक्ति या समूह कृषि आधारित व्यवसाय (जैसे दूध उत्पादन, ऑर्गेनिक खेती, प्रोसेसिंग यूनिट) चलाता है, तो उस पर बिजनेस इनकम के रूप में टैक्स लगाया जाएगा।
किन पर टैक्स लगेगा?
- एग्रीकल्चर ट्रेडिंग कंपनियां
- फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स
- ऑर्गेनिक फार्मिंग कंपनियां
सरकार ने 2025 में ऐसे बिजनेस पर न्यूनतम 15-22% टैक्स लगाने का प्रस्ताव दिया है।
किसानों को टैक्स छूट कैसे मिल सकती है?
सेक्शन 10(1) के तहत छूट
इस सेक्शन के अनुसार, खेत में उगाई गई फसल से मिलने वाली आय पूरी तरह से टैक्स फ्री होती है, बशर्ते कि इसे किसी बिजनेस मॉडल के तहत प्रोसेस न किया गया हो।
सेक्शन 54B के तहत छूट
- अगर किसान खेती की ज़मीन बेचकर दूसरी खेती की ज़मीन खरीदता है, तो उसे टैक्स से छूट मिल सकती है।
- यह छूट सिर्फ व्यक्तिगत करदाताओं को ही मिलती है, कंपनियों को नहीं।
सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट
यदि किसान अपनी आय को किसी सरकारी योजना, PPF, EPF, या अन्य टैक्स सेविंग स्कीम में निवेश करता है, तो उसे टैक्स में कटौती का फायदा मिल सकता है।
असली किसानों और जमींदारों में अंतर
सरकार अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि असली किसान और निवेश के रूप में ज़मीन खरीदने वाले जमींदारों में अंतर किया जाए। बहुत से लोग सिर्फ टैक्स बचाने के लिए खेती की ज़मीन खरीदते हैं, जबकि असली किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाता।
सरकार की नई योजनाओं का उद्देश्य:
- असली किसानों को छूट देना
- खेती को एक व्यवसायिक मॉडल बनने से रोकना
- टैक्स चोरी को कम करना
किसानों के लिए क्या बेहतर विकल्प है?
2025 में खेती की ज़मीन से जुड़ी इनकम टैक्स नीतियों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। असली किसानों को सरकार की ओर से टैक्स छूट दी जा रही है, लेकिन जमींदारों और बिजनेस मॉडल के तहत खेती करने वालों को टैक्स देना पड़ेगा।
क्या करना चाहिए?
- यदि आप शहरी क्षेत्र में खेती कर रहे हैं, तो टैक्स नियमों को ध्यान में रखें।
- अगर आप अपनी खेती की ज़मीन बेचने की योजना बना रहे हैं, तो सेक्शन 54B का लाभ उठाएं।
- किसानों को चाहिए कि वे टैक्स सेविंग स्कीम्स में निवेश करें, ताकि टैक्स कम किया जा सके।
कुल मिलाकर, सरकार का उद्देश्य असली किसानों को टैक्स में राहत देना और टैक्स चोरी को रोकना है। इसलिए हर किसान को इन नए नियमों को समझकर अपनी टैक्स प्लानिंग करनी चाहिए।